Mar Gaya Deepnath
चन्द्रकिशोर जायसवाल अपने आसपास के समाज और जीवन को सहज भाव से देखते-पढ़ते हैं, और उसी सहजता से उसके विरोधाभासों की ओर संकेत करते हुए ऐसी कहानी लिखते हैं, जिससे पाठक फ़ौरन जुड़ जाता है। मर गया दीपनाथ कहानी-संग्रह में शीर्षक कथा के अलावा पाँच कहानियाँ और हैं। लगभग सत्तर पृष्ठों में फैली कहानी ‘मर गया दीपनाथ’ हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिकता को मनोवैज्ञानिक स्तर पर समझने की कोशिश करती है, और उन बड़े मूल्यों को रेखांकित करती है जिनके आधार पर भारत की साझी सामाजिकता आकार ग्रहण करती है। साधारण शैली में असाधारण कहानियाँ रचनेवाले कथाकार चन्द्रकिशोर जायसवाल ने मध्यवर्गीय पारिवारिक जीवन को गहरी संवेदनशीलता के साथ अंकित किया है, साथ ही ग्रामीण जीवन के ऐसे चित्र भी उनके यहाँ मिलते हैं जिनसे स्वातंत्र्योत्तर भारत में विभिन्न स्तरों पर घटित होनेवाले बदलावों के सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक निहितार्थों को समझना आसान हो जाता है। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ न सिर्फ़ उनके कथाकार के विभिन्न पक्षों को सामने लाती हैं, बल्कि अपनी पठनीयता और यथार्थबोध के चलते हमारी स्मृति का हिस्सा बन जाती हैं। चन्द्रकिशोर जायसवाल अपने आसपास के समाज और जीवन को सहज भाव से देखते-पढ़ते हैं, और उसी सहजता से उसके विरोधाभासों की ओर संकेत करते हुए ऐसी कहानी लिखते हैं, जिससे पाठक फ़ौरन जुड़ जाता है। मर गया दीपनाथ कहानी-संग्रह में शीर्षक कथा के अलावा पाँच कहानियाँ और हैं। लगभग सत्तर पृष्ठों में फैली कहानी ‘मर गया दीपनाथ’ हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिकता को मनोवैज्ञानिक स्तर पर समझने की कोशिश करती है, और उन बड़े मूल्यों को रेखांकित करती है जिनके आधार पर भारत की साझी सामाजिकता आकार ग्रहण करती है। साधारण शैली में असाधारण कहानियाँ रचनेवाले कथाकार चन्द्रकिशोर जायसवाल ने मध्यवर्गीय पारिवारिक जीवन को गहरी... Read More
Categories: Action & Adventure







