Ladies Club ( लेडीज क्लब ) Hardcover – 30 June 2025
सुप्रसिद्ध कथाकार नमिता सिंह दृष्टि संपन्न, सजग और संवेदनशील रचनाकार के रूप में विख्यात हैं। ‘अपनी सलीबें’ के बाद उनका दूसरा उपन्यास है ‘लेडीज़ क्लब’। यह उपन्यास भारतीय समाज में सांप्रदायिक राजनीति और उससे उपजी हिंसा के वातावरण में तेजी से बदल रहे सामाजिक समीकरणों, विशेषकर मध्यवर्गीय अल्पसंख्यक समुदाय के मानसिक और परिवेशगत बदलाव की अंतरंग पड़ताल गहन आत्मीयता और संवेदना के साथ करता है। इसी आत्मीयता और संवेदना की एक झलक: ‘उस बरस कुलसुम बेन का आठवीं में पढ़ने वाला जफर ही नहीं पगलाया। जमीन तो जमीन, पागलपन के काले बादलों ने जैसे पूरा आसमान ही छेक लिया था… और फिर बादल ऐसा बरसे कि जन, जंगल और जमीन सब लथपथ हो रिसते रहे, लंबे समय तक। पूरा इतिहास दलदल बनकर धसकने लगा था।’ यहां आप पाएंगे कि हालात का कथा-रिपोर्ताज है और हाइटेक सूचना क्रांति के बीच पंख तेज़ कर उड़ती हवाएं कैसे झूठ के पांव बना देती हैं! झूठ के इस दलदल में कैसे धंसता चला गया एक शहर और कैसे उससे लथपथ होती गई मुल्क की आत्मा। इस उपन्यास को पढ़ना, दरअसल कुंद होती जा रही संवेदना को जगाने का एक रचनात्मक अनुभव है।
Categories: Action & Adventure







