Kya Koi Pankti Doobegi Khoon Mein | क्या कोई पंक्ति डूबेगी ख़ून में

Naresh Saxena . Unknown Year . Hindi

चम्बल के नज़दीक स्थित शहर ग्वालियर में जनमे और बचपन तथा कैशोर्य में उसके आसपास के जंगलों में पले-बढ़े नरेश सक्सेना की कविता में इस इलाक़े के अवाम की स्वाभाविक विशेषताएँ—सरलता, सचाई, प्यार, बग़ावत और करुणा—छलछलाती हैं। लगभग सात दशक पहले रचना-यात्रा शुरू करने के कुछ ही समय बाद नरेश सक्सेना ने कुछ अनूठे गीत भी लिखे और ग़ौरतलब है कि उनकी कोमलता, प्रवाह और मर्मस्पर्शिता को ज़रा बदले हुए विन्यास में अपनी कविताओं में भी अक्षुण्ण रखा। सुदीर्घ रचनात्मक जीवन के लिहाज़ से उन्होंने कम लिखा, मगर जो भी लिखा, वह अपने प्रभाव में अनुपम और अप्रत्याशित है। उसकी गहनता असंदिग्ध है, इसीलिए व्यापकता भी। बाँसुरी वादन में नरेश जी की प्रवीणता के चलते उनकी सर्वश्रेष्ठ कविताओं में भी कुछ वैसी ही कशिश, मार्मिकता और सम्मोहन है। जो संगीत का सच है, वही उनकी कविता का। इस मानी में नरेश सक्सेना के सम्पूर्ण अवदान के उत्कृष्टतम को सामने लाने वाली ये शताधिक चयनित कविताएँ मनुष्य, मनुष्येतर जीव-सृष्टि और प्रकृति से वाबस्ता उनके प्यार, पीड़ा और युयुत्सा की अविस्मरणीय रचनात्मक साक्ष्य हैं।

Categories: Poetry

About the Author

Learn more about Naresh Saxena and their other notable works on the BookR app. Download the app today to get deeper insights into your favorite authors.

Books from Similar Categories

Books from the Same Genre

Download BookR now and choose mindful reading!

Download Now!