Do Behnein

Do Behnein . Unknown Year . HINDI

रवीन्द्रनाथ ठाकुर के उपन्यास आधुनिक जीवन-स्थितियों का आभ्यन्तर प्रस्तुत करते हुए स्त्री के भीतर स्त्री की अनवरत खोज की आश्चर्यजनक चेष्टाओं का दिग्दर्शन कराते हैं। उनके काव्य की अनन्त उन्मुक्ति में विस्तार पाती स्त्री उनके उपन्यासों में ऊबड़-खाबड़ धरती पर उतरती है, लेकिन अपने मज्जागत आदर्श को हृदय से अवश्य चिपटाए रहती है। यहीं कहीं उसके आस-पास पुरुष विद्यमान रहता है, अपनी समस्त प्रवृत्तियों के अंकुशाघात से घायल—कभी स्त्री के सहारे, कभी स्वयं उपन्यासकार के सहारे, और कभी अपने ही बुने जाल की गाँठें खोलने को सन्नद्ध। ‘दो बहनें’ ऐसा ही उपन्यास है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर के उपन्यास आधुनिक जीवन-स्थितियों का आभ्यन्तर प्रस्तुत करते हुए स्त्री के भीतर स्त्री की अनवरत खोज की आश्चर्यजनक चेष्टाओं का दिग्दर्शन कराते हैं। उनके काव्य की अनन्त उन्मुक्ति में विस्तार पाती स्त्री उनके उपन्यासों में ऊबड़-खाबड़ धरती पर उतरती है, लेकिन अपने मज्जागत आदर्श को हृदय से अवश्य चिपटाए रहती है। यहीं कहीं उसके आस-पास पुरुष विद्यमान रहता है, अपनी समस्त प्रवृत्तियों के अंकुशाघात से घायल—कभी स्त्री के सहारे, कभी स्वयं उपन्यासकार के सहारे, और कभी अपने ही बुने जाल की गाँठें खोलने को सन्नद्ध। ‘दो बहनें’ ऐसा ही उपन्यास है।

Categories: Action & Adventure

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